Monday, April 20, 2009

कॉमिक्स यात्रा-2

सवागत है दोस्तो, पिछली पोस्ट में मैने अपने बचपन के कॉमिक्स प्रेमी साथियो के बारे में लिखने की बात कही थी. तो आज मै फिर से हाजिर हूँ.





लेकिन पहले आज कि खास बात. मै्ने दो साल पहले कॉमिक्स डाऊनलोड करनी शुरु कि थी. आज 20.05.2009 को मेरे पास पुरी 1000 कॉमिक्स है. आज सुबह जब मैने अपने प्रिय पात्र डोगा कि हैडलाइन डाऊनलोड की तो ये 1000 वी कॉमिक्स थी.


सभी कॉमिक्सो की सुची यहाँ पर है. मै कॉमिक्स अपलोड करने वाले सभी साथीयो का शुक्रिया अदा करता हुँ.


हॉं तो बात करते है बचपन के कॉमिक्स प्रेमी साथियो कि, वैसे तो बचपन में छुट्टियो मे पापा मुझे चंपक आदि किताबे दिलाते थे. कभी- कभी कोई पुरानी कॉमिक्स मिलती तो उसे पढता था.


सबसे पहले शहजाद जो मेरा रिश्तेदार है. उसने मुझे कॉमिक्स पढने को दी. मुझे ये तो याद नही वो कॉमिक्स कौन सी थी. लेकिन मुझे कॉमिक्स का चस्का लग चुका था.


फिर मैने कॉमिक्स किराये पर लेकर पढनी शुरु की. क्योकि मुझे घर से इतने पैसे नही मिलते थे कि मै कॉमिक्स खरीदता. किराये के पैसे कम लगे इसलिए हम कई दोस्त अलग-अलग कॉमिक्स किराये पर लेते और अदल बदल कर कॉमिक्स पढते.


अमजद, राजकुमार, गौरव, सरफराज, फ़ैसल, अतिन आदि मेरे दोस्त थे. हम कॉमिक्स को लेकर अक्सर झगडते थे. स्कुल में भी हम हिन्दी के घन्टे मे कॉमिक्स पढते.


लेकिन आजकल बच्चे कॉमिक्स ज्यादा पसंद नही करते. कॉमिक्स कि जगह अब गेम्स, टी.वॊ ने ले ली है. ये दोनो चीजे बच्चो के लिए खतरनाक है. गेम्स से बच्चे हिसंक, हो जाते है. ये हमारे याद्दाश्त कम करते है. टी.वॊ के कार्यक्रम भी आजकल हिसंक, अश्लील और उबाऊ है.


जबकि कॉमिक्स और पत्रिकाए हमारा मनोरंजन करने कए साथ साथ हमे जानकारी देती है. पढने की चाह जगती है. मुझे कई चीजे कॉमिक्सो से ही पता चली जैसे-


चुम्बक के गुण गर्मी से खत्म हो जाते है. चुम्बक के समान ध्रुव मिलाने पर दुर भागते है.
ताडित चालक.
अम्ल तथा क्षार (Acid & Base) के गुण.


ये सभी बाते मैने बाद मे कक्षा 8-9 में पढी. इसके अलावा सुपर हीरो कैसे मुसीबतो से निकलता है. ये भी रोचक और याद रखने लायक होता है.

मेरा सबसे यही कहना है कि कॉमिक्स हमारी जानकारी बढाती है. हमारी पढने कि इच्छा को बढाती है. सभी लोग अपने बच्चो को कॉमिक्स और अच्छी पत्रिकाए पढने को दे. और कॉमिक्स कि लोकप्रियता बढाने में सहायता करे.

7 comments:

मोहम्मद कासिम जी।
आपका प्रयास सराहनीय है।
मैं भी नजीबाबाद का ही मूल निवासी था।
परन्तु 35 साल पहले ।

@ Dr. Sahab
u r welcome
thanks for comments

This comment has been removed by the author.

Hi kasim ,

Actually i have already visited your blog in the past but i have not commented on it.It is nice to know that you have downloaded 1000th comic.Keep on doing good work. Just keep on helping others.


Regards
Rajesh (aka slimshady )

thanks rajesh

कासिम जी,
कॉमिक्स का दीवाना तो मैं भी बचपन में खूब रहा हूं. आर्ची तो अभी भी पसंद है और पढ़ता हूं टाइम्स में. बांकेलाल के क्या कहने!

फायरफाक्स संस्करण 2 पर हिन्दी ठीक नहीं दिखती. आप संस्करण 3 प्रयोग करें. ओपेरा का संस्करण 9 प्रयोग करें. लिनक्स पर ओपरा या फायरफाक्स के बजाए कॉन्करर का प्रयोग करें, जिसमें हिन्दी बढ़िया दिखता है

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