Wednesday, June 10, 2009

आजकल

हाल ही में कानपुर के कॉलेजो में लडकियो के जींस और ग्लैमरस कपडे पहनने पर पाबन्दी लगायी गयी। ये बहुत अच्छा फ़ैसला है। आज इसको पुरे भारत में लागू करने की जरुरत है। लडकिया ऎसे कपडे पहनकर खुद मौसीबतो को दावत देती है।

इस पैसले का सभी मुस्लिम संगठन, अन्य धर्मिक संगठन तथा समझदार अभिभावक स्वागत करेगे।

आज हम ये समझ रहे है कि अमेरिका और युरोपीय देशो कि नकल करके ही हम आगे बढ सकते है। लेकिन हमारी नकल केवल फैशन और रहन तक ही सीमित है। जबकि हमे ऎसी चीजो कि नकल करनी चाहिऎ जिनसे हमे फयदा हो.

हमे नकल करनी चाहिऎ उनकी प्रशासनिक व्यवस्था की।
हमे नकल करनी चाहिऎ उनकी कानुन व्यवस्था की।
हमे नकल करनी चाहिऎ उनकी यातायत व्यवस्था की।
हमे नकल करनी चाहिऎ उनकी तकनीक की।
हमे नकल करनी चाहिऎ उनकी सफाई व्यवस्था की।
हमे नकल करनी चाहिऎ बुनियादी ढाचें की।

हालांकि मेरा उदेश्शय नकल को बढावा देना नही है। बल्कि हमें इन बातो को सोचकर, इनकि पडताल कर अपने देश के हालात और संसाधनो के मुताबिक अपनी खुद का सिस्टम विकसित करे.

हमारी तरक्की केवल फैशन कि नकल करने से नही होगी। तथाकथित तरक्की पसंद और नारीवादी संगठन इसका विरोध करेगे। पर मेरे विचार से ये एक सही फैसला है। इससे छेडखानी कि घटनाओ में निश्चित रुप से कमी आयेगी। हालांकि मजनु टाइप और गुण्डे बदमाशो को तो पुलिस ही रोकेगी। लेकिन भाडकाऊ कपडे और मेकअप देखकर छेडखानी करने वाली घटनाऎ जरुर रुकेगी|

भाडकाऊ कपडे पहनना केवल पुरुषो को रिझाना है। मै ये नही कहता कि बिल्कुल बुर्के में रहे। बल्कि शालिन और भारतीय लिबास पहनना चाहिए। शालिनता और सादगी ही सबसे बडी खुबसुरती है।
लडको कि भी ये जिम्मेदारी है कि महीलाओ को इज्जत करें। लडकियो से बुरा व्यवहार करने वालो को रोकें.

6 comments:

आमीन।

Qasim,very good write up and very appreciable thoughts.Keep it up.

मेरा समर्थन है।
मुझे अच्छा लगता है उनका आंकड़ों पर जोर देना प्रबंधन के लिए।

thnaks for visiting

एक अच्छे विशय के नारे मे अप्ने विचार को खुल्के बताने के लिये पहले मेरे मन्काम्नाये ले लिजिये कासिम भाई.

यहा तमिल नादु के अन्ना यूनीवर्सिटि मे भि यैसे कप्दो मे पाबन्ति लग्गयि गयि है ।

Keep the Good Writing Going.

ÇómícólógÝ

THANK U RAFEEK BHAI.
KEEP VISITING

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